Saturday, 11 June 2016

1. आये बाहर यूं तो गुबार की तरह


1. आये बाहर यूं तो गुबार की तरह


आये बाहर यूं तो गुबार की तरह
हुए दर्ज़ वही फिर अशआर की तरह

बेसब्री से उठाया फिर रद्दी में रख दिया
हम पढ़े भी गए तो अख़बार की तरह

सुबह शाम सबको मुबारक कह कर
हर दिन मनाया है त्यौहार की तरह

हर शै में नफ़ा नुक़सान तोलते हैं
मुहब्बत भी की तो क़ारोबार की तरह

फ़ासले मिटते कैसे, हैसियत हमारी
गई है बीच दीवार की तरह

हो कैसेअमितमुकम्मल ग़ज़ल
मक़ता फंस गया है हर बार की तरह


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Wednesday, 8 June 2016

~ फ़ेहरिस्त ~


1.      आये बाहर यूं तो गुबार की तरह
2.      लिख के गुफ़्तगू जो ग़म से करने लगे
3.      असली या फ़र्ज़ी अच्छी नहीं लगती
4.      भूला हुआ या नया बता कर गया
5.      नुक्तें की क़द्र पर नुक्ताचीं को नहीं देखा
6.      कोशिशें सारी फ़िज़ूल कर लीं
7.      धड़कनें गिनी, नब्ज़ तक पहुँचे
8.      खींच के हद--लफ़्ज़ में लाये जायेंगे
9.      उठाकर सर पे है आसमान लिखना
10.    क्या हुआ कि दोस्त भी अजनबी हो गए
11.    थे और भी क़ाफ़िले संग, बढ़ जाने वाले
12.    था मज़बूत मगर अकड़ से उखड़ गया
13.    ज़माने के दिए तो कम होते हैं
14.    आए, गए, घर में रहे
15.    पूछा तुमने बहरहाल मेरा था
16.    फ़लाँ, फ़लाँ, फ़लाने, फ़लाने चले गए
17.    कहने को वामपंथी, समाजवादी बहुत हैं
18.    हमने निभाया है, ख़ुद हमने उतारा है
19.    मिला, रुका अजीब से गुज़र गया
20.    रिसेगा, छलकेगा, बिखर जाएगा
21.    आपकी सुनते हैं आपकी ही बोलते हैं
22.    उठती हुई लहर को क़हर होने तक
23.    दया, दुआ, रहम कोई मुराद नहीं मांगी
24.    आया है अब तो लौटकर जाए
25.    ऊँचा पर उस तलक तक नहीं पहुँचा
26.    खींचते रहे चादर, सिकुड़ कर नहीं देखा
27.    अबतलक गुज़ारी फुर्सत नहीं देती
28.    कोई मिलन कोई विरह भी नहीं है
29.    भूलने लगे जो विसाल--यार गुज़रे
30.    ख़ातिर जिनके अरसे गुज़ार दिए हमने
31.    वक़्त ही है अब मरहम कह कर
32.    यूं भी नहीं कि खैरात बढ़कर नहीं देते
33.    जैसे मिली उसी सौग़ात पे लिख दी
34.    बिखेरना संजोना ख़्वाब सीख गए
35.    ये राज़--तन्हाई नामहफ़ूम सा है
36.    ख़्याल--ख़ुशबू से दोस्ताना हो जाता है
37.    भटकता है इधर-उधर आवारा हो गया
38.    नज़र आयें बांये पर दाहिने होते हैं
39.    हर ठोकर पे पाई है उछाल सी ज़िंदगी
40.    सूख गया अभी पर कभी हरा था
41.    दुनिया से एक फ़ाज़िल फ़ासला छोड़कर
42.    दरमियाँ सितारों के अजब ताब पे था
43.    दर्ज काग़ज़ों में हर बयानी हो जायेगी
44.    बेतकल्लुफ़ है कुछ ज्यादा, वक़्त नहीं देते
45.    किताबों से अक्ल में ज़राफ़त नहीं जाती
46.    ज़द, हद, दायरे, लकीर में नहीं आये
47.    ऐसे गुज़रा कि कई ख़्वाब खुरच गया
48.    अज़ीज़ मुझे रंज ग़म की तरह
49.    बदले कभी चाहे तो बुरा ही रहे
50.    रुसवाई थोड़ी बदनामियों के साथ
51.    पूछते हैं सारा हालचाल रखते हैं
52.    महफूज़ है सीने में पुख़्ता बहुत है
53.    ख़ुद को उम्र के उस पार देखकर
54.    यूं नहीं दौर--मुश्किल मुश्किल नहीं लगता
55.    मशवरे, नसीहतें, सलाह, सीख नहीं मांगी
56.    तजुर्बों तमाम तल्ख़ियों से सीखा है
57.    रोज़ कोई नया बहाना बना रक्खा है
58.    कितनी कबतलक मुक़र्रर होती है
59.    बावजूद कोशिश के ऊपर नहीं आता
60.    भाषा में भी भ्रष्टाचार, घोटाला होता है
61.    जलाते ही दीया, तेज़ हवा होना
62.    कायनात तो कुछ क़ुदरत ने बना दिया
63.    अजीब शै है, हर बार पहला लगता है
64.    अच्छा बुरा मन माफ़िक़ सोचिये
65.    ख़लल, ख़्यालात, हालात से निकलती है
66.    इत्तेफाक़ रखियेगा इस बात के साथ
67.    इबादत, सवाब, दुआ में थे
68.    खंगालने में ख़ुद को खोता जा रहा हूँ
69.    घुटती रहीं जहन में तो ज़ख्म बन गई
70.    उछल कर मुंह से दांतों में गया
71.    रंज, रश्क, सोज़ तपन तो होगी
72.    दिल्लगी, शोशा थोड़ी अदाकारी होती है
73.    सिफ़ारिश किसी की बदौलत मिली है
74.    फिसला जहन से जैसे ढाल से उतर गया
75.    मिन्नतें रोज़ क्या-क्या नहीं करते
76.    कोपलें नए ख़्यालों की फलने-फूलने नहीं देती
77.    रिश्ते अटूट भी देखना टूट जायेंगे
78.    बैठी हुई शक्कर को हिलाकर बोलता हूँ
79.    दीये, दीपक दियालों से होगी
80.    इससे तो बुरा अच्छा था
81.    ज्यादा मिठाई अच्छी नहीं लगती
82.    गुंजाइश, कोई जगह भी नहीं थी
83.    शायद सही मौक़ा नहीं होता
84.    ख़ुद--ख़ुद नया कुछ बनता नहीं है
85.    हमसफ़र, हमनफस, हमदम छूट गए
86.    नज़र कोई उम्मीद बची नहीं आती
87.    जला के चाँद, चांदनी ओढ़ के सो गए
88.    बात ज़माने की ही, हर दफ़ा बोलता है
89.    बुलाकर क़रीब दूर कुछ क़दम हो गई
90.    ख़्याल सोच सबब जान जाते है
91.    थम गया वक़्त घड़ी एकदम रुक गई
92.    कल गई है फिर कल गई तो
93.    मायने रुख, पहलू देखता कौन है
94.    वजह कोई सबब पूछते है
95.    बात हो चर्चा तो चले
96.    डूब जाती, सतह पे यूं ठहरी नहीं होती
97.    ख़ुशियाँ गईं तो ग़म ने ले ली
98.    वजह क्या है पता नहीं है
99.    गुमनाम, अनजाने तारों के साथ
100. अक़ीदा कहता है वो यहीं आयेगा